श्री बांके बिहारी मंदिर
स्वामी हरिदास जी
यहाँ विग्रह में स्वामी हरिदास जी की भक्ति से प्रकट त्रिभंगी लाल रूप है। पर्दा बार-बार हटाया-लगाया जाता है (झांकी दर्शन)। वर्ष में केवल अक्षय तृतीया पर चरण दर्शन होते हैं।
॥ मंदिर दर्शन ॥
ब्रजधाम के प्रमुख दर्शनीय मंदिर
स्वामी हरिदास जी
यहाँ विग्रह में स्वामी हरिदास जी की भक्ति से प्रकट त्रिभंगी लाल रूप है। पर्दा बार-बार हटाया-लगाया जाता है (झांकी दर्शन)। वर्ष में केवल अक्षय तृतीया पर चरण दर्शन होते हैं।
श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी
शालिग्राम शिला से स्वतः प्रकट राधा रमण जी का अद्भुत विग्रह। यहाँ 500 वर्षों से रसोई में अखंड अग्नि प्रज्वलित है।
श्री हित हरिवंश महाप्रभु
यहाँ श्री राधा रानी के वल्लभ (श्री कृष्ण) की पूजा होती है। सेवा-पद्धति और समाज-गायन अत्यंत अद्वितीय है।
स्वामी हरिदास जी की तपोस्थली
अत्यंत रहस्यमयी वन — मान्यता है कि आज भी हर रात्रि श्री राधा-कृष्ण महारास करते हैं। शाम की आरती के बाद मनुष्य व पशु-पक्षी भी यहाँ प्रवेश नहीं करते।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
इटैलियन सफेद संगमरमर से निर्मित आधुनिक वास्तुकला का अद्भुत नमूना। रात्रि में रंग-बिरंगी लाइटिंग और संगीतमय फव्वारे आकर्षण हैं।
स्वामी प्रभुपाद
अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ का मुख्यालय। यहाँ 24 घंटे अखंड हरे कृष्ण महामंत्र का संकीर्तन चलता है।
श्री जीव गोस्वामी
यहाँ सनातन गोस्वामी जी की गोवर्धन शिला स्थापित है — इसकी 4 परिक्रमा से संपूर्ण गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का फल मिलता है।
राजा मानसिंह (1590 ई.)
लाल बलुआ पत्थर से बना 7 मंजिला ऐतिहासिक मंदिर। औरंगजेब के आक्रमण में इसकी ऊपरी मंजिलें क्षतिग्रस्त हुई थीं।
स्वामी हित हरिवंश
मान्यता है कि यहाँ श्री कृष्ण श्री राधा रानी के चरणों में महावर लगाते हैं और उनके केश संवारते हैं।
दक्षिण भारतीय शैली
उत्तर भारत का सबसे बड़ा द्रविड़ शैली मंदिर — विशाल गरुड़ स्तंभ और स्वर्ण ध्वज स्तंभ विशेष हैं।
🚩 कुल दूरी: लगभग 10–12 किलोमीटर।
🚩 मार्ग: इस्कॉन मंदिर → कालीदह → केशी घाट → टटिया स्थान → अटल्ला चुंगी → पुनः आरंभ बिंदु।
🚩 समय: प्रातः 4:00 बजे से या संध्याकाल में नंगे पैर परिक्रमा करने का विशेष विधान है।
बांके बिहारी मंदिर सुबह 7:30 से दोपहर 12:00 और शाम 4:45 से रात 9:30 बजे तक खुला रहता है। यहाँ झांकी दर्शन (पर्दा दर्शन) होते हैं — सोमवार को सुबह के दर्शन बंद रहते हैं।
मान्यता है कि निधिवन में आज भी हर रात श्री राधा-कृष्ण महारास करते हैं। शाम की आरती के बाद यहाँ मनुष्य और पशु-पक्षी दोनों प्रवेश नहीं करते — यह वृंदावन का सबसे रहस्यमयी स्थल है।
सुबह 7:30 बजे शृंगार आरती के समय भीड़ कम और दर्शन सुंदर रहते हैं। मध्यम अवधि (12:00–4:45) में मंदिर बंद रहता है — सुबह या शाम जाना उत्तम।
वृंदावन परिक्रमा लगभग 10–12 किलोमीटर की है — इस्कॉन मंदिर, कालीदह, केशी घाट, टटिया स्थान होकर नंगे पैर पूर्ण की जाती है।