॥ संत परंपरा ॥

संत एवं महापुरुष

धाम के प्रकाशस्तम्भ

ऐतिहासिक संत

श्रीमन् महाप्रभु चैतन्य

वृंदावन के पुनरोद्धारक और नाम संकीर्तन आंदोलन के जनक (1515 ई. में वृंदावन यात्रा)।

स्वामी हरिदास जी

शास्त्रीय संगीत के मर्मज्ञ, तानसेन के गुरु — जिनकी भक्ति से बांके बिहारी जी प्रकट हुए।

श्री हित हरिवंश महाप्रभु

राधावल्लभ संप्रदाय के प्रवर्तक — श्री राधा तत्व को सर्वोच्च स्थान दिया।

षड् गोस्वामी गण

सनातन, रूप, जीव, गोपाल भट्ट, रघुनाथ दास और रघुनाथ भट्ट गोस्वामी — वृंदावन के भक्ति शास्त्रों के रचयिता।

मीराबाई एवं सूरदास

भक्त शिरोमणि — अपने पदों से ब्रज भक्ति को वैश्विक पहचान दी।

आधुनिक एवं समकालीन

ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद

इस्कॉन संस्थापक — हरे कृष्ण महामंत्र को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाया।

देवरहा बाबा

सिद्ध योगी — यमुना तट पर काष्ठ के मचान (टॉवर) पर रहकर लाखों भक्तों को आशीर्वाद देते थे।

नीम करोली बाबा

कैंची धाम / वृंदावन आश्रम के अलौकिक संत — अनुयायियों में स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग जैसी हस्तियां।

पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज

वृंदावन के सर्वाधिक प्रभावशील संत — राधा कृपा कटाक्ष व निष्काम नाम जप के उपदेशक। रात्रि 2 बजे की पदयात्रा में हजारों दर्शन करते हैं।

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

प्रेम मंदिर और भक्ति धाम के संस्थापक।