स्वामी हरिदास जी
तानसेन व बैजू बावरा के संगीत गुरु — ध्रुपद-धमार और समाज गायन शैली के उद्गम।
॥ संगीत एवं कीर्तन ॥
ब्रज धरा — संगीत और संकीर्तन का मुख्य केंद्र
वृंदावन की भूमि संगीत और संकीर्तन का मुख्य केंद्र रही है — स्वामी हरिदास जी की ध्रुपद-धमार परंपरा से लेकर आज के महान कीर्तनकारों तक, यहाँ हर गली में हरि नाम गूंजता है।
तानसेन व बैजू बावरा के संगीत गुरु — ध्रुपद-धमार और समाज गायन शैली के उद्गम।
दिवंगत संकीर्तन सम्राट — हरि नाम संकीर्तन और हरिदासी शैली में गाए भजनों ने विश्व भर में ब्रज रस का प्रसार किया।
वृंदावन के प्रसिद्ध युगल भजन गायक — अपनी भावपूर्ण शैली के लिए जाने जाते हैं।
भागवत प्रवक्ता व भजन गायक — "राधे राधे जपो चले आएंगे बिहारी" जैसे अमर भजनों के गायक।
"किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए" जैसे प्रसिद्ध भजनों के गायक।
युवा भागवत प्रवक्ता एवं सुरीले भजन गायक।
प्रख्यात कथावाचिकाएं और भजन गायिकाएं।
ब्रज भाषा के मस्तमौला रसिक संत व गायक।