श्री बांके बिहारी मंदिर
स्वामी हरिदास जी
यहाँ विग्रह में स्वामी हरिदास जी की भक्ति से प्रकट त्रिभंगी लाल रूप है। पर्दा बार-बार हटाया-लगाया जाता है (झांकी दर्शन)। वर्ष में केवल अक्षय तृतीया पर चरण दर्शन होते हैं।
॥ राधे राधे ॥
दिव्य प्रेम की पावन भूमि
वृंदावन केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है — यह सनातन संस्कृति, भक्ति मार्ग और भगवान श्री राधा-कृष्ण की नित्य लीलाओं का केंद्र है। यमुना के तट पर बसा ब्रजमंडल का हृदय।
परिचय
'वृंदा' का अर्थ है तुलसी और 'वन' का अर्थ है जंगल — अर्थात तुलसी का पवित्र वन ही वृंदावन है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में यमुना नदी के तट पर बसा यह धाम ब्रजमंडल का हृदय कहलाता है।
यहाँ की प्रत्येक बूँद — कदम्ब के वृक्ष, यमुना के तट, गलियों की धूल — भक्तों के लिए श्री राधा-कृष्ण की नित्य लीलाओं की साक्षी है।
इतिहास पढ़ेंप्रमुख मंदिर
स्वामी हरिदास जी
यहाँ विग्रह में स्वामी हरिदास जी की भक्ति से प्रकट त्रिभंगी लाल रूप है। पर्दा बार-बार हटाया-लगाया जाता है (झांकी दर्शन)। वर्ष में केवल अक्षय तृतीया पर चरण दर्शन होते हैं।
श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी
शालिग्राम शिला से स्वतः प्रकट राधा रमण जी का अद्भुत विग्रह। यहाँ 500 वर्षों से रसोई में अखंड अग्नि प्रज्वलित है।
श्री हित हरिवंश महाप्रभु
यहाँ श्री राधा रानी के वल्लभ (श्री कृष्ण) की पूजा होती है। सेवा-पद्धति और समाज-गायन अत्यंत अद्वितीय है।
स्वामी हरिदास जी की तपोस्थली
अत्यंत रहस्यमयी वन — मान्यता है कि आज भी हर रात्रि श्री राधा-कृष्ण महारास करते हैं। शाम की आरती के बाद मनुष्य व पशु-पक्षी भी यहाँ प्रवेश नहीं करते।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
इटैलियन सफेद संगमरमर से निर्मित आधुनिक वास्तुकला का अद्भुत नमूना। रात्रि में रंग-बिरंगी लाइटिंग और संगीतमय फव्वारे आकर्षण हैं।
स्वामी प्रभुपाद
अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ का मुख्यालय। यहाँ 24 घंटे अखंड हरे कृष्ण महामंत्र का संकीर्तन चलता है।
त्यौहार
वसंत पंचमी से शुरू होकर 40 दिनों तक चलने वाला उत्सव — लट्ठामार होली, छड़ीमार होली, रंगभरी एकादशी और फूलों की होली।
सावन मास में भगवान के विग्रहों को भव्य सोने-चांदी के झूलों में विराजमान किया जाता है।
संपूर्ण क्षेत्र दुल्हन की तरह सजता है — महाअभिषेक और मध्यरात्रि पूजन।
संपूर्ण कार्तिक माह श्रद्धालु परिक्रमा, दीपदान और कड़े नियमों का पालन करते हैं।